Janmashtami festival 2020 | जन्माष्टमी का त्योहार

Janmashtami festival 2020 | जन्माष्टमी का त्योहार

Janmashtami का festival हमारे देश के एक छोर से दूसरे सिरे तक बड़े उल्लास भर आनंद के साथ मनाया जाता है | या festival होली दिवाली दशहरा आदि की तरह विशुद्ध रूप से धार्मिक त्योहार है | यह पवित्र आधार पर 57 किमी शुद्धता का प्रतीक है यह त्योहार श्रद्धा और विश्वास के साथ साथ सात्विक भाव का उदय होता है | मुख्य रूप से यह त्यौहार confidence और आत्म चेतना का प्रयोग वर्ग संवाहक है |

Janmashtami festival 2020 | जन्माष्टमी का त्योहार
Janmashtami festival 2020


Janmashtami का त्योहार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की रात्रि को मनाया जाता है | यूं तो इस त्योहार का आयोजन इसके प्रमुख अतिथि से कई दिन पुरवा आरंभ हो जाता है कृष्णा के बाल स्वरूप की आराधना उपासना के अंतर्गत उल्लेखित पर यह स्वरूप का चिंतन मान लिया जाता है बालक shree krishna की बाल लीलाओं को आधार बनाकर नाटक परिसंवाद आयोजित की जाती है इन सबसे अधिक रोचक और आकर्षक सदस्य नियम द्वारा किया हुआ करती है |

Janmashtami festival 2020


Janmashtami मनाने के विषय में यह पौराणिक कथा shreemad bhagawad puran के अनुसार द्वापर युग में मथुरा का राजा पंच बड़ा ही अत्याचार था वह जब अपनी बहन के विवाह के बाद उसके ससुराल जाने के लिए रास्ता आकाशवाणी हुई कि जिस बहन को तुम इतने लाड प्यार के साथ विदा कर रहे हो उसी की आठवीं संतान तुम्हारी मृत्यु का कारण होगी कौन सा कहानी कब सुन कर बड़ा किया उसने अपनी बहन जी को जान से मारने के लिए तलवार खींच ली थी | तब हमको vasudev ने धैर्य देते हुए समझाया जयेश के हिसाब से आपकी मृत्यु होगी तभी से आज बंदी बना लीजिए इसका जो भी पुत्र होगा कि आपको यह कह कर के दे दिया करेगी आप जो चाहे वह कीजिएगा कसने वसुदेव की बात मान ली और देवकी तथा वासुदेव को जेल में डाल दिया उन पर कड़ी निगरानी रखने का आदेश भी दिया कहा जाता है कि कल स्नेह देवकी के एक-एक करके आ सात पुत्रों को पटक-पटक कर मार डाला आठवें पुत्र shree krishna की जगह पर वासुदेव ने अपने मित्र आनंद की पुत्री को आकाशवाणी ज्ञान और सरकार को यह दिया का स्नेह पुत्र या पुत्री का भी सामना करने को दवाई के फल स्वरुप उस कन्या को जैसे ही पढ़ने के लिए प्रयत्न किया वैसे ही वह कन्या उसके साथ से छूट करवा आकाशवाणी करती हुई निकल गई है उसके भाई से तुमने मुझे मारना साहेब वजन मले सुखा है वो रघुकुल पहुंच चुका है किंकर्तव्यविमूढ़ मुकरबा क्रोध से विकसित हो उठा उसने आदेश दिया कि आज जो भी बसें पैदा हुए हैं उन्हें मार डालो ऐसा ही किया गया उसने गोकुलमें अपने प्रतिनिधियों उतना जैसी मायावती को भेजकर कृष्णा को मार डालने की कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन कृष्ण तो पारब्रह्म परमेश्वर के अवतार थे इसलिए उनका कुछ भी बाल बांका ना हो सका है इसके विपरीत घोषणा ने केवल  कौंच के प्रतिनिधियों को मार डाला अपितु कंस की जीवन लीला को समाप्त कर दिया |

भगवान श्री कृष्ण की इस परम लीला की झांकी और प्रदर्शनी जन्माष्टमी के दिन प्रयुक्त प्रत्यय श्रद्धालुओं के द्वारे जन्माष्टमी के पावन समय पर प्रस्तुत की जाती है भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र और जीवन सुखी की रूप रेखा के द्वारा हमें उनके स्वरूप के विविध दर्शन वरदान प्राप्त होते हैं जिनमें मुख्य रुप से श्री कृष्ण का योगी व्यवस्था,कूटनीतिक ,कलाकार ,तपस्वी महान पुरुष ,थे दार्शनिक प्रशासक, का मनुष्य आदि स्वरूप है | इसके साथ ही साथ एक नगर लोकग्राम जब युवक संस्थापक और लोक प्रतिनिधित्व स्वरूप का भी हमें ज्ञान और दर्शन जन्माष्टमी का त्योहार मनाने से सहज ही प्राप्त हो जाता है भगवान धर्म संस्थापक पापियों के विध्वंसक और साधुओं के लक्षण है यह भी बहुत हमें मन और आत्मा से बार-बार हो जाता है |

Janmashtami के त्योहार की बनाने का ढंग बड़ा ही समझदार हो सके यह त्योहार को मनाने के लिए सभी श्रद्धालुओं सवेरे सवेरे ही अपने 12 आवासों की सफाई करके उसे धार्मिक चिन्हों के द्वारा सजाते हैं | विभिन्न प्रकार के धार्मिक कृत्यों को करते हैं और व्रत रखते हुए श्री कृष्ण लीला मांस और श्री कृष्ण कीर्तन करते रहते हैं बड़े बड़े नगरों में तो इस त्यौहार को बड़े पैमाने पर संपन्न पर आयोजित करने के लिए कई दिन पहले से ही थी और तैयारी आरंभ हो जाती है नगर की गलियां गलियां रे विविध प्रकार के साथ सज्जा से झूम झूम उठते हैं मिठाइयों की दुकानें कपड़ों की दुकानें खिलौनों की दुकान है मंदिर और अन्य धार्मिक संस्थानों सहित कई प्रकार के सामाजिक प्रतिष्ठा न दिए सज-धज कर चमक उठते हैं सब के ताजे पूछा बच्चों ने होता है अन्य भक्त गण तो इस त्यौहार को सबसे बड़ा आनंद आया और उत्साह पूर्वक के रूप में समझ कर अपने तन मन को न्योछावर करने के लिए प्रस्तुत किया करते हैं सवेरे से चिरकुंडा का मन की मन स्मरण और संपूर्ण भाव से नाम जापू जन्माष्टमी के त्योहार को कुछ पूजा पाठ करने दान पुण्य प्रांत के रूप में धारण करते हैं ||

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