Rakshabandhan festival 2020 | रक्षाबंधन

Rakshabandhan festival 2020 | रक्षाबंधन


रक्षाबंधन हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है जो पूरे भारत में बड़े उत्साह से मनाया जाता है इस त्यौहार को राखी का त्यौहार भी कहा जाता है यह त्यौहार सावन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है |

Rakshabandhan festival 2020 | रक्षाबंधन
Rakshabandhan festival 2020


रक्षाबंधन भाई बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है इस दिन सभी बहने अपने भाइयो की कलाई पर राखी बांध ती है |

बहने पूजा की थाली को कुमकुम दिया चावल मिठौरा कैसे सजाते हैं वह अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती है और उनकी कलाई पर राखी बांधती है वह भाइयों को मिठाई बुलाती है वर्क उनके लिए मंगल कामना करती है भाई भी बहन को उपहार भेंट करते हैं वह उनकी रक्षा का प्रण लेते हैं |

इस दिन भर घर में स्वादिष्ट पकवान व मिठाईयां बनती है लोक मित्र परिवार और रिश्तेदारों में मिठाइयों का आदान प्रदान करते हैं |

आज के इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में हर कोई अपने काम में व्यस्त रहता है पर रक्षाबंधन जैसे त्यौहार हमें इस व्यस्तता से मुक्त करके अपने प्रियजनों से मिलने का अवसर प्रदान करते हैं |

रक्षाबंधन भाई बहन का त्यौहार है यह सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की दुआ करती है भाई जी उनकी रक्षा का वचन देते हैं जब सावन का फर्क है रक्षा का बंधन राखी सोने जैसी महंगी धातु की बनी हो सकती हैं यह दिन घरों के बाहर राम और सीता के नाम की पर सीमा लगी होती है |

करो मैं जिस दिन बहुत से व्यंजन बनते हैं रक्षाबंधन के दिन लोगों के अंडों की रक्षा के लिए उन पर भी राखी बांधते हैं इस दिन महिलाओं का यात्रा का कोई किराया भी नहीं लगता है बहुत सी महिलाएं राखी  कोरियर भी करती है और कोरियर के लिए स्पेशल लिफाफे बनाया गया है जिसमें 1 से ज्यादा राखी भेजी जा सकती हूं |

बहुत बड़ा त्योहार है आज भी एक दिन यज्ञोपवीत का बदला जाता है रक्षाबंधन पर राखी बांधने के हमारी सदियों पुरानी परंपरा रही है कहीं सारी पौराणिक कथाओं में इसका वर्णन देखने को मिलता है जिससे यह पता चलता है कि यह प्राचीन काल से ही मनाया जा रहा है यह त्योहार क्षेत्र के भाई बहन का बल्कि शहर है अरे भाई बहनों में भी मनाया जाता है इस पवित्र त्यौहार से जुड़ी खोज पौराणिक कथा है यह फक्र है इंद्र देव की दंतकथा भविष्य पुराण के अनुसार एक बार देवराज इंद्र 1 दानों के राजा बलि के बीच युद्ध हुआ तो देवराज इंद्र राजा बलि से बुरी तरह पराजित हो गई है इंदिरा को इस दशा में देखकर उनकी पत्नी शशि ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की तब उन्होंने यह पवित्र धागा शशि को दिया और इंदिरा की कलाई पर बांधने के लिए कहा इसके पश्चात तारीख को हरा दिया महाभारत काल में भी कहा जाता है कि एक बार भगवान श्री कृष्णा की उंगली कट गई थी तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी को फाड़कर गली में बांध दिया था 2 दिन के इस कार्य में भगवान श्री कृष्ण के दिल को छू लिया और उन्होंने गणपति को रक्षा का वचन दिया उनके पात्रों परिवार वासियों को नवरात्रि रूपी पवित्र धागा बांधने लगे जब द्रोपदी को गौरव द्वारा चीर हरण किया जा रहा था तब भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा की थी ऐसी ही एक घटना मुगल काल के दौरान ही की है जब मेवाड़ पर बहादुर सामने आक्रमण किया तो रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी बेचकर सहायता मांगी थी क्योंकि रानी स्वयं एक वीर योद्धा थी और वह स्वयं युद्ध में कूद पड़ी थी लेकिन आने में देर हो गई और रानी को जो हर करना पड़ा रक्षाबंधन पर रविंद्र नाथ टैगोर के विचार भी प्रशंसनीय है रविंद्र नाथ टैगोर का मानना था कि रक्षाबंधन से 1 के बीच के रिश्ते को मजबूत करने का दिन नहीं है बल्कि इस दिन में हमें अपने लक्ष्य के साथ भी अपने संबंध मजबूत करने का है या प्रसिद्ध लेखन बंगाल के विभाजन की बात सुनकर टूट चुके थे अंग्रेजी सरकार अपनी पोस्ट डालो और राज करो की नीति से बंगाल राज्य को दो भागों में बांट दिया था हिंदू और मुस्लिमों के बढ़ते टकराव के आधार पर यह बंटवारा किया था यही वह समय था जब रविंद्रनाथ टैगोर के हिंदू और मुस्लिमों को एक दूसरे के करीब लाने के लिए रक्षाबंधन उत्सव की शुरुआत की उन्होंने दोनों दलों के लोगों से एक दूसरे को यह पवित्र धागा मान्यवर उनकी रक्षा करने के लिए कहा जिससे दोनों धर्मों के बीच संबंध प्रगाढ़ हो सके और इधर बंगाल में अभी भी लोग एकता और साम्राज्य को बढ़ावा देने के लिए अपने दोस्तों और पड़ोसियों को राखी बांधते हैं रक्षाबंधन मान्यताओं का बंधन है यह प्रेम त्याग और कर्तव्य का बंधन है इस बंधन में एक बार फोन उठाने पर इतना बड़ा कठिन है इस पवित्र धागे में बहुत शक्ति होती है राखी का भाइयों के लिए याद का खास महत्व है |

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